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लेखनी प्रतियोगिता -09-Jan-2023

*वन के बिना जीवन नहीं*
विधा : कविता

नदियाँ पहाड़ और वन
जहाँ से चलती है ठंडी हवाएं। 
जो मौसम को खुशनम: बनाकर
कह रही है अपनी कहानी की। 
देखो देखो चारो तरफ हरियाली
जो कह रही खूबसूरती की कहानी।
और सभी को लूभा कर
अपनी तरफ खीचें जा रही है।। 

छल छल कल कल करती नदी
गिरती ऊपर पहाड़ से झरनो जैसी। 
घने जंगल और टेढ़े मेड़े रास्तो से
झरझर छलछल करके दौड़ रही। 
और प्रकृति के सौंदरिय का चित्रण
हमसब को खूबसूरती से दिखा रही। 
और हमको पहाड़ी और नदी किनारे
वो दिलसे मानो हमसब को बुला रही।। 

मौसम और प्रकृति का ये अद्भूत
दृश्य हम सब को लालचा रहा। 
चारो ओर हँसते खिल खिलाते 
 उड़ते हुये नीले आकाश में पंक्षी। 
जो इंसानो को प्यार मोहब्बत 
आपस में करना मानो सिखा रहा।
और अब तो खुद प्रकृति कह रही
मतकरो मेरे संसाधनों से छेड़ छाड़।
छोड़ दो मुझे अपने हाल पर तुम।। 

-अभि लाषा देशपांडे

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2 Comments

Anshumandwivedi426

10-Jan-2023 08:01 AM

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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Abhinav ji

10-Jan-2023 07:45 AM

Nice

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